राहुल सांकृत्यायन ने उनको ' अनगढ़ हीरा ' कहा था तो जगदीशचंद्र माथुर ने ' भरत मुनि की परंपरा का कलाकार ' ।
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राहुल सांकृत्यायन ने उनको ‘ अनगढ़ हीरा ' कहा था तो जगदीशचंद्र माथुर ने ‘ भरत मुनि की परंपरा का कलाकार ' ।
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महापंडित राहुल जी ने भिखारी को जहां भोजपुरी का शेक्सपीयर व अनगढ़ हीरा कहा, वहीं जगदीशचंद्र माथुर ने उन्हें भरतमुनि की परंपरा का (प्रथम) लोकनाटककार माना।
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महापंडित राहुल सांकृत्यायन उन्हें भोजपुरी का अनगढ़ हीरा और शेक्सपीयर कहा करते थे, प्रख्यात शिक्षाविद् जगदीशचंद्र माथुर भरतमुनी की नाट्य परंपरा का अग्रदूत कहा, यह सब तो मंचों पर बार-बार दुहराई जानेवाली बात हो चुकी है.
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अपने बाबूजी की थी मैं अनगढ़ हीरा सँवारा, तराशा बनाया मुझे, बनाकर मुझको एक अनमोल हीरा अपनी ही चमक से चमकाया मुझे, अपने माँ की थी मैं जिद्दी बिटिया डाँटा-डपटा, समझाया मुझे, दुनियादारी की बातें बताकर रानी बिटिया बनाया मुझे, जब बड़ी हुयी तो बड़े जत...
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अपने बाबूजी की थी मैं अनगढ़ हीरा सँवारा, तराशा बनाया मुझे, बनाकर मुझको एक अनमोल हीरा अपनी ही चमक से चमकाया मुझे, अपने माँ की थी मैं जिद्दी बिटिया डाँटा-डपटा, समझाया मुझे, दुनियादारी की बातें बताकर रानी बिटिया बनाया मुझे, जब बड़ी हुयी तो बड़े जत
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जब भिखारी ठाकुर को भोजपुरी का शेक्सपीयर, अनगढ़ हीरा, लोकनायक, लोकनाट्य सम्राट वगैरह-वगैरह कहा जा रहा था तब जगजीवन बाबू उनके बारे में कहते थे-जिसे लगता हो उसकी जवानी अब शेष नहीं रही, बुढ़ापा हावी हो रहा है, वह एक बार भिखारी मंडली का तमाशा देख ले, जवानी लौट आयेगी. सच ही तो कहते थे जगजीवन बाबू.